पाराशरी ज्योतिष पाठशाला

ज्योतिष पाठशाला में पढ़ें।

तीस महीने में ज्योतिषी बनें।।

पाठशाला में ज्योतिषज्ञान तीन खण्डों में दिया जायेगा-

प्रत्येक खण्ड-10 मास का होगा।

प्रथमखण्ड

प्राथमिक ज्योतिष पाठशाला

द्वितीयखण्ड

माध्यमिक ज्योतिष पाठशाला

तृतीयखण्ड

उच्चमाध्यमिक ज्योतिष पाठशाला

प्राथमिक ज्योतिष पाठशाला विषय-

           1- पञ्चाङ्ग का सर्वांङ्गीण अध्ययनज्ञान।
           2- नक्षत्र,नक्षत्रपति तथा राशिस्वरूप का ज्ञान।
           3- सम्वत्,सम्वत्सर,अयन,मास,पक्ष,तिथिफल।
           4- ऋतु,योग,करण,गण तथा योनिफल ज्ञान।
           5- ग्रह,ग्रहपति,राशियों का उच्च-नीच व दिशाफल।
           6- दिग्बल,अयनबलादि षडबल, लग्नराशि अध्ययन।
           7- जन्मकुण्डली,राशिकुण्डली पर गोचरफल कथन।
           8- नवाँशादि षोडशवर्गों का विस्तृत अध्ययन।
           9- ग्रहों की मित्रता-शत्रुता एवं पंचधा-तात्कालिक स्थितवश फल।

द्वितीयखण्ड-माध्यमिक ज्योतिष पाठशाला के विषय -

   1- अंशों के आधारपर पुष्कर नवांश और मृत्युभाग फल।
   2- अस्तग्रह,ग्रहाबस्था ज्ञान और अध्ययन तथा फल।
   3- राजयोग,धनयोग कैसे बनते हैं और फलकथन विधि।
   4- ग्रहों,राशियों और भावों के कारक तथा कारकत्व फल।
   5- महादशा,अन्तरदशा,प्रत्यन्तरदशा का नियम तथा फल।
   6- नक्षत्रों का फल कैसे करें और नक्षत्र सिद्धान्त को समझें।
   7- ग्रहों का भावफल,केन्द्र-त्रिकोण के स्वामियों के फल।
   8- ग्रहों की सामान्य और विशेषदृष्टि तथा नीचग्रहों का फल।
   9- इन्दुलग्न,पदलग्न और उपपदलग्न से सटीक फलित।

तृतीयखण्ड- उच्चमाध्यमिक पाठशाला-

    1- भावात्-भावम् का सिद्धान्त और ग्रहफलों में सटीकता।
    2- राशिपरिवर्तन,परस्पर केन्द्र-त्रिकोण सम्बन्धी फल
    3- अष्टकवर्ग,भिन्नाष्टकवर्ग के सिद्धान्त से सटीक फल।
    4- भावेशों का फल,दृष्टि और युतियों का फल सिद्धान्त।
    5- लग्नकुण्डली तथा नवांशकुण्डली मिलाकर फलादेश।
    6- राशितुल्य नवांश से फल,भाव को लग्नमानकर फलादेश।
    7- ऋषियों के अचूक और गुप्त सूत्रों का प्रयोग कैसे करें।
    8- स्थायी और चरकारकों से फल कैसे करें।
    9- लघुपाराशरी,फलदीपिका और पाराशर होराशास्त्र का
    विशेष अध्ययन।

10- पचौरी गुरुजी का चालीस बर्षों का ज्ञान और अनुभव